आचार्य जिनप्रबोधसूरि

आचार्य जिनेश्वरसूरि (द्वितीय) के पट्ट पर जिनप्रबोधसूरि हुए। आप बड़े भारी विद्वान् और प्रभावक थे। विवेकसमुद्र गणि रचित “श्री जिनप्रबोधसूरि चतुः सप्ततिका” के अनुसार आपका जन्म गुजरात के थारापद्र नगर में ओसवाल साहू खींवड गोत्रीय श्रीचंद और उनकी पत्नी सिरिया देवी के यहाँ सम्वत 1285 में हुआ। आपका जन्म नाम मोहन था। सम्वत 1297 में … Read more

आचार्य जिनेश्वरसूरि (द्वितीय)

खरतरगच्छ के प्रारंभिक काल में 11वीं सदी में आचार्य वर्धमानसूरि के शिष्य जिनेश्वरसूरि हुए, जिन्होंने दुर्लभराज की सभा में “खरतर” विरुद प्राप्त किया था। उसी परंपरा में 13वीं सदी में आचार्य जिनपतिसूरि के पाट पर जिनेश्वरसूरि हुए जिन्हें आचार्य जिनेश्वरसूरि (द्वितीय) के नाम से सम्बोधित किया गया। आप एक महान शासन-प्रभावक आचार्य हुए। आपके कर-कमलों … Read more

उपाध्याय जिनपाल

महान वादजयी जिनपतिसूरि के शिष्य समुदाय में उपाध्याय जिनपाल प्रमुख थे। आपकी दीक्षा सम्वत 1225 में पुष्कर नगर में हुई। सम्वत 1269 में जालौर के विधिचैत्य में जिनपतिसूरि ने आपको उपाध्याय पद प्रदान किया। सम्वत 1273 में राजा पृथ्वीचन्द्र की राजसभा में जिनपतिसूरि की आज्ञा से उपाध्याय जिनपाल ने काश्मीरी पंडित मनोदानन्द के साथ शास्त्रार्थ … Read more