दादा गुरुदेव मणिधारी श्री जिनचंद्रसूरि जी की आरति

जय जय मणिधारी, आरति करूँ हितकारी,सुख सम्पति कारी ।। जय ।। गुण मणि आगर, महिमा सागर, भवि जन हितकारीदीन दयाल दया कर मोपर जिन शासनवारी ।। जय ।। ग्यारसें सत्तानवे वरसे अपनी हरख वधाईबारेसें तेवीसे वर्षे सुर पदवी पाई ।। जय ।। कर जोड़ी सेवक गुण गावे, मन वांछित पावेश्री जिनचंद्र कृपा कर मोपर, मंगल … Read more

सप्रभाव स्तोत्र

युगप्रधान श्री जिनदत्तसूरि कृत सप्रभाव स्तोत्र मम हरउं जरं मम हरउ विझरं डमरं डामरं हरउ  । चोरारि-मारि-वाही हरउ ममं पास-तित्थयरो  ।। १ ।। एगंतरं निच्चजरं वेल जरं तह य सीय-उण्ह-जरं  । तईअ-जरं चउत्थ-जरं हरउ ममं पास-तित्थयरो  ।। २ ।। जिणदत्ताणापालणपरस्स संघस्स विहि-समग्गस्स  । आरोग्गं सोहग्गं अपवग्गं कुणउ पास-जिणो  ।। ३ ।। अनुवाद हे पार्श्व तीर्थंकर … Read more

गुरु इकतीसा

* दोहा * श्री गुरुदेव दयाल को, मन में ध्यान लगाय । अष्ट सिद्धि नव निधि मिले, मन वांछित फल पाय ।। * चौपाई * श्री गुरु चरण शरण में आयो, देख दर्श मन अति सुख पायो । दत्त नाम दुख भंजन हारा, बिजली पात्र तले धरनारा ।।१।। उपशम रस का कन्द कहावे, जो सुमरे … Read more

दादा श्री जिनदत्तसूरि काव्यम्

दासानुदासा इव सर्वदेवा यदीय पदाब्जतले लुठंति मरुस्थलीकल्पतरुः स जीयात् युगप्रधानो जिनदत्तसूरिः  ।।१।। चिंतामणिः कल्पतरूर्वराकौ कुर्वन्ति भव्याः किमु कामगव्या प्रसीदतः श्रीजिनदत्त सूरे सर्वे पदा हस्तिपदे प्रविष्टाः  ।।२।। नो योगी न च योगिनी न च नराधीशश्च नो शाकिनी नो वेताल-पिशाच राक्षसगणा नो रोगशोकौ भयं नो मारी न च विग्रहप्रभृतयः प्रीत्या प्रणत्युच्चकैः यस्ते श्री जिनदत्तसूरिः गुरवे नामाक्षरं ध्यायति  … Read more