श्रीमद् देवचन्द्र

देवचंद जिन पूजना, करतां भव पार जिन पडिमा जिन सारखी, कही सूत्र मझार आज प्रत्येक श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन जिस स्नात्र पूजा की भावपूर्ण पंक्तियों को गुनगुनाता है उसके रचनाकार श्रीमद् देवचन्द्र जी हैं। जैन साहित्य में चौबीस तीर्थंकरों पर रची गई चौबीसियों की संख्या सैकड़ों में है। परन्तु आज भी आनन्दघन जी तथा देवचन्द्र जी … Read more

आचार्य जिनरत्नसूरि

आचार्य जिनराजसूरि के पट्ट्धर श्री जिनरत्नसूरि जी हुए। सम्वत 1670 में मरुधर देश के सेरुणा ग्राम में लूणिया गोत्रीय तिलोकसी एवं माता तेजलदे के यहां आपका जन्म हुआ। जन्म नाम रूपचन्द था। सेठ तिलोकसी के देहान्त के पश्चात वैराग्यवासित माता ने श्री जिनराजसूरि जी से बीकानेर में निवेदन किया कि मुझे मेरे दोनों पुत्रों के … Read more

आचार्य जिनराजसूरि – द्वितीय

आचार्य जिनसिंहसूरि जी के पट्टधर श्री जिनराजसूरि जी हुए। आपका जन्म बीकानेर निवासी बोथरा गोत्रीय श्रेष्ठि धर्मसी की धर्मपत्नी धारलदेवी की रत्नकुक्षि से सम्वत 1647 वैशाख सुदि 7 के दिन हुआ। आपका जन्म नाम खेतसी कुमार था। बाल्यकाल में ही आप समस्त कलाओं का अभ्यास कर निपुण बन गए। एक बार खरतरगच्छाचार्य श्री जिनसिंहसूरि जी … Read more

महोपाध्याय समयसुंदर

राजस्थान में कहावत है – समयसुंदर रा गीतड़ा, कुंभे राणे रा भींतड़ा। अर्थात् जिस प्रकार महाराणा कुंभा द्वारा बनाये गए कुम्भलगढ़ किले की दीवार (विश्व की दूसरी सबसे लम्बी दीवार) का पार पाना अत्यंत कठिन है, उसी प्रकार महोपाध्याय समयसुंदर जी की समस्त रचनाओं का पता लगाना भी दुष्कर है। महोपाध्याय समयसुंदर जी 17 वीं … Read more

आचार्य जिनसिंहसूरि

चतुर्थ दादा गुरुदेव श्री जिनचन्द्रसूरि जी के पट्टधर आचार्य जिनसिंहसूरि जी हुए।  आप असाधारण प्रतिभाशाली विद्वान और कठिन साध्वाचार पालनेवाले प्रभावक आचार्य थे। आपका जन्म सम्वत 1615 के मार्गशीर्ष पूर्णिमा को खेतासर ग्राम में हुआ। आपके पिता का नाम चोपड़ा गोत्रीय शाह चांपसी और माता का नाम चांपल देवी था। आपका जन्म नाम मानसिंह था।  … Read more

दादा गुरुदेव युगप्रधान जिनचंद्रसूरि

सवाई युगप्रधान भट्टारक, बादशाह अकबर व जहाँगीर प्रतिबोधक, श्री जिनमाणिक्यसूरि जी के पट्टधर, चतुर्थ दादा गुरुदेव श्री जिनचन्द्रसूरि जी हुए।  आप अपने चारित्र बल एवं लोकोत्तर प्रभाव से विधर्मी शासकों को प्रभावित कर जैन धर्म और तीर्थों की रक्षा करनेवाले महापुरुष थे। आपने धर्म क्रान्ति करके जैन संघ में आयी हुई विकृतियों को दूर किया। … Read more

आचार्य जिनमाणिक्यसूरि

श्री जिनहंससूरि जी के पट्ट पर श्री जिनमाणिक्यसूरि जी हुए। आपका जन्म सम्वत 1549 में कूकड-चोपड़ा गोत्रीय साह राउलदेव और माता रयणा देवी के यहां हुआ। आपका जन्म नाम सारंग था। सम्वत 1560 में 11 वर्ष की अल्पायु में बीकानेर में आप श्री जिनहंससूरि जी के हस्ते दीक्षित हुए। आपकी विद्वत्ता और योग्यता देखकर गच्छनायक … Read more

आचार्य जिनहंससूरि

श्री जिनसमुद्रसूरि जी के पट्ट पर गच्छनायक श्री जिनहंससूरि जी हुए। सम्वत 1524 में आपका जन्म हुआ था। सेत्रावा नामक ग्राम में चोपड़ा गोत्रीय साह मेघराज आपके पिता और श्री जिनसमुद्रसूरि जी की बहन कमला देवी माता थी। आपका जन्म नाम धनराज था। सम्वत 1535 में 11 वर्ष की आयु में आपकी दीक्षा विक्रमपुर में … Read more

आचार्य जिनसमुद्रसूरि

आचार्य जिनचन्द्रसूरि जी के पट्टधर श्री जिनसमुद्रसूरि जी हुए। आप उच्च कोटि के साधक एवं उद्भट विद्वान् थे। आपका जन्म सम्वत 1506 में हुआ था। आपके पिता बाड़मेर निवासी, पारख गोत्रीय, देकोसाह थे। आपकी माता का नाम देवल देवी था। सम्वत 1521 में आपकी दीक्षा हुई और नाम कुलवर्धन मुनि रखा गया। दीक्षा नंदी महोत्सव … Read more

आचार्य जिनचन्द्रसूरि

महान प्रभावक आचार्य जिनभद्रसूरि जी के पट्ट पर श्री जिनचन्द्रसूरि जी हुए। आपका जन्म सम्वत 1487 में जैसलमेर निवासी चम्म गोत्रीय साह वच्छराज और माता वाल्हा देवी के यहां हुआ। आपका जन्म नाम करणा था। सम्वत 1492 में आपकी दीक्षा हुई और दीक्षा नाम कनकध्वज रखा गया। सम्वत 1515 ज्येष्ठ वदि 2 के दिन, कुम्भलमेरु … Read more