आचार्य बुद्धिसागरसूरि

आचार्य बुद्धिसागरसूरि मध्य देश के निवासी थे। उनके पिताजी का नाम कृष्ण था। इनका बचपन का नाम श्रीपति था और वे जिनेश्वरसूरि के भाई थे। दोनों ही भाई बड़े प्रतिभावान थे। उन्होंने छोटी उम्र में ही ब्राह्मणीय परंपरा के अनेक धर्म शास्त्रों का अध्ययन किया। एक बार दोनों भाई देशाटन हेतु घूमते घूमते धारा नगरी … Read more

आचार्य जिनेश्वरसूरि

खरतर परंपरा जैन धर्म में स्वर्ण अक्षरों से अंकित है। इसका मूल कारण चैत्यवास का उन्मूलन और सुविहित मार्ग का प्रचार है। आज से लगभग 1000 वर्ष पहले आचार्य वर्धमानसूरि हुए। उन्होंने वेद विद्या सम्पन्न श्रीधर और श्रीपति बंधुओं को अपना शिष्य बनाया। उनका नाम जिनेश्वर और बुद्धिसागर रखा और क्रमशः आचार्य पद प्रदान किया। … Read more

आचार्य वर्धमानसूरि

लाखों को जैन बनानेवाला गच्छ, जिसमें चार दादा गुरुदेव जैसी महान विभूतियाँ हुई, उसकी शुरुआत कैसे हुई, आओ जानें। खरतर परंपरा श्रृंखला का आरम्भ खरतरगच्छ के प्रवर्तक आचार्य श्री जिनेश्वरसूरि के गुरु श्री वर्धमान सूरिजी के जीवन परिचय से करते हैं। आचार्य श्री वर्धमानसूरि चैत्यवासी जिनचंद्राचार्य के शिष्य थे। चैत्यवासी साधु शिथिलाचारी होने के कारण … Read more