दादा गुरुदेव मणिधारी श्री जिनचंद्रसूरि जी की आरति

जय जय मणिधारी, आरति करूँ हितकारी,सुख सम्पति कारी ।। जय ।। गुण मणि आगर, महिमा सागर, भवि जन हितकारीदीन दयाल दया कर मोपर जिन शासनवारी ।। जय ।। ग्यारसें सत्तानवे वरसे अपनी हरख वधाईबारेसें तेवीसे वर्षे सुर पदवी पाई ।। जय ।। कर जोड़ी सेवक गुण गावे, मन वांछित पावेश्री जिनचंद्र कृपा कर मोपर, मंगल … Read more

दादा गुरुदेव युगप्रधान जिनचंद्रसूरि

सवाई युगप्रधान भट्टारक, बादशाह अकबर व जहाँगीर प्रतिबोधक, श्री जिनमाणिक्यसूरि जी के पट्टधर, चतुर्थ दादा गुरुदेव श्री जिनचन्द्रसूरि जी हुए।  आप अपने चारित्र बल एवं लोकोत्तर प्रभाव से विधर्मी शासकों को प्रभावित कर जैन धर्म और तीर्थों की रक्षा करनेवाले महापुरुष थे। आपने धर्म क्रान्ति करके जैन संघ में आयी हुई विकृतियों को दूर किया। … Read more

आचार्य जिनचन्द्रसूरि

महान प्रभावक आचार्य जिनभद्रसूरि जी के पट्ट पर श्री जिनचन्द्रसूरि जी हुए। आपका जन्म सम्वत 1487 में जैसलमेर निवासी चम्म गोत्रीय साह वच्छराज और माता वाल्हा देवी के यहां हुआ। आपका जन्म नाम करणा था। सम्वत 1492 में आपकी दीक्षा हुई और दीक्षा नाम कनकध्वज रखा गया। सम्वत 1515 ज्येष्ठ वदि 2 के दिन, कुम्भलमेरु … Read more

आचार्य जिनचंद्रसूरि

आचार्य जिनलब्धिसूरि के पट्टधर श्री जिनचंद्रसूरि जी हुए। मुनि सहजज्ञान रचित “श्री जिनचंद्रसूरि विवाहलउ” के अनुसार आपका जन्म मरुदेश के कुसुमाण गाँव में हुआ। आपके पिता का नाम मंत्री केल्हा था और माता का नाम सरवस्ती था। आपका बचपन का नाम पाताल कुमार था। सम्वत 1380 में दिल्ली नगर के श्रेष्ठि रयपति का विशाल यात्री संघ … Read more

कलिकाल केवली जिनचन्द्रसूरि

आचार्य जिनप्रबोधसूरि के पट्ट पर जिनचन्द्रसूरि हुए। आप “कलिकाल केवली” के विरुद से सम्मानित थे। आपने विभिन्न वादियों पर विजय प्राप्त की थी। दादा जिनकुशलसूरि रचित “जिनचन्द्रसूरि चतुः सप्ततिका” के अनुसार आप समियाणा (सिवाणा) के मंत्री छाजेड़ गोत्रीय देवराज की धर्मपत्नी कोमलदेवी के सुपुत्र थे। आपका जन्म सम्वत 1324 मार्गशीर्ष सुदि 4 को हुआ। आपका … Read more

दादा गुरुदेव मणिधारी जिनचंद्रसूरि

दादा गुरुदेव श्री जिनदत्तसूरि जी के पट्टधर, सूर्य के समान तेजस्वी आचार्य श्री जिनचंद्रसूरि, मणिधारी दादा गुरुदेव के नाम से जाने जाते हैं। असाधारण व्यक्तित्व एवं लोकोत्तर प्रभाव के कारण अल्प आयु में जो प्रसिद्धि आपने प्राप्त की वह परमात्मा महावीर के शासन के स्वर्णिम इतिहास का एक अनूठा अध्याय है। एक बार श्री जिनदत्तसूरि … Read more

संवेग रंगशाला के रचयिता आचार्य जिनचंद्रसूरि

आचार्य जिनेश्वरसूरि के पट्ट पर सूरियों में श्रेष्ठ श्री जिनचंद्रसूरि हुए। वे नवांगी टीकाकार अभयदेवसूरि के वरिष्ठ गुरुभ्राता थे। खरतरगच्छ की परंपरा में जिनचंद्रसूरि के नाम से अनेक प्रभावशाली आचार्य हुए। उनमें से प्रथम नाम “संवेग रंगशाला” के रचनाकार आचार्य श्री जिनचंद्रसूरि का है। संवत 1125 में आचार्य अभयदेवसूरि के निवेदन पर सूरिजी ने अठारह … Read more