दादा गुरुदेव जिनकुशलसूरि

प्रकट प्रभावी, कामित कल्पतरु, भक्तजन वत्सल, शासन प्रभावक, अतिशयधारी, दादा गुरुदेव श्री जिनकुशलसूरि अपने समय के युगप्रधान महापुरुष थे। आपके परम पवित्र जीवन चरित्र और गुणों का वर्णन कवियों ने अनेक स्तुति एवं स्तवनों से किया है। आज से लगभग 700 वर्ष पूर्व की विकट परिस्थितियों में भी आपने अपने प्रभावशाली धर्मोपदेश से प्रतिबोधित कर … Read more

कलिकाल केवली जिनचन्द्रसूरि

आचार्य जिनप्रबोधसूरि के पट्ट पर जिनचन्द्रसूरि हुए। आप “कलिकाल केवली” के विरुद से सम्मानित थे। आपने विभिन्न वादियों पर विजय प्राप्त की थी। दादा जिनकुशलसूरि रचित “जिनचन्द्रसूरि चतुः सप्ततिका” के अनुसार आप समियाणा (सिवाणा) के मंत्री छाजेड़ गोत्रीय देवराज की धर्मपत्नी कोमलदेवी के सुपुत्र थे। आपका जन्म सम्वत 1324 मार्गशीर्ष सुदि 4 को हुआ। आपका … Read more

आचार्य जिनप्रबोधसूरि

आचार्य जिनेश्वरसूरि (द्वितीय) के पट्ट पर जिनप्रबोधसूरि हुए। आप बड़े भारी विद्वान् और प्रभावक थे। विवेकसमुद्र गणि रचित “श्री जिनप्रबोधसूरि चतुः सप्ततिका” के अनुसार आपका जन्म गुजरात के थारापद्र नगर में ओसवाल साहू खींवड गोत्रीय श्रीचंद और उनकी पत्नी सिरिया देवी के यहाँ सम्वत 1285 में हुआ। आपका जन्म नाम मोहन था। सम्वत 1297 में … Read more

आचार्य जिनेश्वरसूरि (द्वितीय)

खरतरगच्छ के प्रारंभिक काल में 11वीं सदी में आचार्य वर्धमानसूरि के शिष्य जिनेश्वरसूरि हुए, जिन्होंने दुर्लभराज की सभा में “खरतर” विरुद प्राप्त किया था। उसी परंपरा में 13वीं सदी में आचार्य जिनपतिसूरि के पाट पर जिनेश्वरसूरि हुए जिन्हें आचार्य जिनेश्वरसूरि (द्वितीय) के नाम से सम्बोधित किया गया। आप एक महान शासन-प्रभावक आचार्य हुए। आपके कर-कमलों … Read more

उपाध्याय जिनपाल

महान वादजयी जिनपतिसूरि के शिष्य समुदाय में उपाध्याय जिनपाल प्रमुख थे। आपकी दीक्षा सम्वत 1225 में पुष्कर नगर में हुई। सम्वत 1269 में जालौर के विधिचैत्य में जिनपतिसूरि ने आपको उपाध्याय पद प्रदान किया। सम्वत 1273 में राजा पृथ्वीचन्द्र की राजसभा में जिनपतिसूरि की आज्ञा से उपाध्याय जिनपाल ने काश्मीरी पंडित मनोदानन्द के साथ शास्त्रार्थ … Read more

सप्रभाव स्तोत्र

युगप्रधान श्री जिनदत्तसूरि कृत सप्रभाव स्तोत्र मम हरउं जरं मम हरउ विझरं डमरं डामरं हरउ  । चोरारि-मारि-वाही हरउ ममं पास-तित्थयरो  ।। १ ।। एगंतरं निच्चजरं वेल जरं तह य सीय-उण्ह-जरं  । तईअ-जरं चउत्थ-जरं हरउ ममं पास-तित्थयरो  ।। २ ।। जिणदत्ताणापालणपरस्स संघस्स विहि-समग्गस्स  । आरोग्गं सोहग्गं अपवग्गं कुणउ पास-जिणो  ।। ३ ।। अनुवाद हे पार्श्व तीर्थंकर … Read more

आचार्य जिनपतिसूरि

दादा गुरुदेव मणिधारी जिनचंद्रसूरि के पट्टधर श्री जिनपतिसूरि हुए। आपका जन्म विक्रमपुर में मालू गोत्रीय यशोवर्धन की धर्मपत्नी सुहवदेवी की रत्नकुक्षि से सम्वत 1210 में हुआ। आपकी दीक्षा दादा जिनचंद्रसूरि के कर कमलों से सम्वत 1217 में हुई। आपका दीक्षा नाम नरपति था। सम्वत 1223 में बड़े महोत्सव के साथ जयदेवसूरि ने आपको आचार्य पद … Read more

गुरु इकतीसा

* दोहा * श्री गुरुदेव दयाल को, मन में ध्यान लगाय । अष्ट सिद्धि नव निधि मिले, मन वांछित फल पाय ।। * चौपाई * श्री गुरु चरण शरण में आयो, देख दर्श मन अति सुख पायो । दत्त नाम दुख भंजन हारा, बिजली पात्र तले धरनारा ।।१।। उपशम रस का कन्द कहावे, जो सुमरे … Read more

दादा गुरुदेव मणिधारी जिनचंद्रसूरि

दादा गुरुदेव श्री जिनदत्तसूरि जी के पट्टधर, सूर्य के समान तेजस्वी आचार्य श्री जिनचंद्रसूरि, मणिधारी दादा गुरुदेव के नाम से जाने जाते हैं। असाधारण व्यक्तित्व एवं लोकोत्तर प्रभाव के कारण अल्प आयु में जो प्रसिद्धि आपने प्राप्त की वह परमात्मा महावीर के शासन के स्वर्णिम इतिहास का एक अनूठा अध्याय है। एक बार श्री जिनदत्तसूरि … Read more