आचार्य जिनचन्द्रसूरि

महान प्रभावक आचार्य जिनभद्रसूरि जी के पट्ट पर श्री जिनचन्द्रसूरि जी हुए। आपका जन्म सम्वत 1487 में जैसलमेर निवासी चम्म गोत्रीय साह वच्छराज और माता वाल्हा देवी के यहां हुआ। आपका जन्म नाम करणा था। सम्वत 1492 में आपकी दीक्षा हुई और दीक्षा नाम कनकध्वज रखा गया। सम्वत 1515 ज्येष्ठ वदि 2 के दिन, कुम्भलमेरु … Read more

आचार्य कीर्तिरत्नसूरि

नाकोड़ा तीर्थ और नाकोड़ा भैरव के संस्थापक, नाकोड़ा पार्श्वनाथ प्रतिमा के पुनर्स्थापक, खरतरगच्छ विभूषण श्री कीर्तिरत्नसूरि जी अपने समय के प्रख्यात विद्वान् और प्रभावशाली आचार्य थे। सम्वत 1449 में कोरटा नगर में आपका जन्म शंखवालेचा (संखलेचा) गोत्रीय पिता देपमल एवं माता देवलदे के यहां हुआ। आपका जन्म नाम देल्हा कुमार था। 13 वर्ष की आयु … Read more

आचार्य जिनभद्रसूरि

आचार्य श्री जिनराजसूरि जी के पट्टधर 15वीं शताब्दी के जगत्प्रसिद्ध, महान ग्रन्थ संरक्षक, अनेक ज्ञानभण्डारों के संस्थापक श्री जिनभद्रसूरि जी हुए। अनेक प्राचीन और महत्वपूर्ण ग्रंथों की बड़ी संख्या में प्रतिलिपि कराने, देश के विभिन्न नगरों में ग्रन्थ भंडारों की स्थापना कराने तथा सैंकड़ों की संख्या में जिन-प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा कराने में किसी भी गच्छ … Read more

आचार्य जिनवर्द्धनसूरि

श्री जिनवर्द्धनसूरि जी पन्द्रहवीं सदी के प्रकांड विद्वान एवं प्रभावक आचार्य थे। आपका जन्म मेवाड़ के कईलवाड़पुर नामक नगर में सम्वत 1436 में मंत्री शाखा के अर्जन श्रेष्ठी और माता लखमिणी देवी के यहां हुआ। आपका जन्म नाम रावण कुमार था। आपकी दीक्षा लगभग 8 वर्ष की आयु में सम्वत 1444 में श्री जिनराजसूरि के … Read more

आचार्य जिनराजसूरि – प्रथम

आचार्य श्री जिनोदयसूरि के पट्टधर श्री जिनराजसूरि हुए। आपका दीक्षा नाम राजमेरु मुनि था। सम्वत 1432 फाल्गुन कृष्ण 6 के दिन पाटण में, श्री लोकहिताचार्य ने गुरु आज्ञा अनुसार आपको आचार्य पद प्रदान कर श्री जिनोदयसूरि जी के पट्ट पर स्थापित किया। और आपका नाम आचार्य जिनराजसूरि रखा गया। बोथरा तेजपाल के सुपुत्र कडुआ व … Read more

आचार्य जिनोदयसूरि

आचार्य श्री जिनचन्द्रसूरि के पट्ट पर श्री जिनोदयसूरि हुए। आपका जन्म सम्वत 1375 में पालनपुर में हुआ था। आपके पिता माल्हू गोत्रीय साह रुद्रपाल थे एवं माता का नाम धारल देवी था। आपका जन्म नाम समर कुमार था। लगभग 8 वर्ष की आयु में बहन कील्हू के साथ, सम्वत 1382 में भीमपल्ली के श्री महावीर … Read more

आचार्य जिनचंद्रसूरि

आचार्य जिनलब्धिसूरि के पट्टधर श्री जिनचंद्रसूरि जी हुए। मुनि सहजज्ञान रचित “श्री जिनचंद्रसूरि विवाहलउ” के अनुसार आपका जन्म मरुदेश के कुसुमाण गाँव में हुआ। आपके पिता का नाम मंत्री केल्हा था और माता का नाम सरवस्ती था। आपका बचपन का नाम पाताल कुमार था। सम्वत 1380 में दिल्ली नगर के श्रेष्ठि रयपति का विशाल यात्री संघ … Read more

आचार्य जिनलब्धिसूरि

आचार्य जिनपद्मसूरि के पट्टधर श्री जिनलब्धिसूरि जी हुए। श्री तरुणप्रभाचार्य कृत “श्री जिनलब्धिसूरि चहुत्तरी” में आपका जीवन वृत्तांत दिया गया है। आपके पिता का नाम नवलखा गोत्रीय धणसिंह और माता का नाम खेताही था। आप माड़ देश की नगरी जैसलमेर के निवासी थे। सम्वत 1360 में ननिहाल सांचौर में आपका जन्म हुआ और नाम लक्खणसिंह … Read more

आचार्य जिनपद्मसूरि

दादा गुरुदेव श्री जिनकुशलसूरि जी के पट्टधर श्री जिनपद्मसूरि जी हुए। आपके पिता खीमड कुलरत्न अम्बदेव थे तथा आपकी माता का नाम कीकी था। सम्वत 1384 में लगभग 9 वर्ष की आयु में कुशल गुरुदेव के हस्ते आपकी दीक्षा हुई और पद्ममूर्ति नाम रखा गया। कुशल गुरुदेव ने अपना आयुशेष जानकर, तरुणप्रभाचार्य और लब्धिनिधान महोपाध्याय … Read more

आचार्य जिनप्रभसूरि

आचार्य जिनपतिसूरि के पट्टधर श्री जिनेश्वरसूरि (द्वितीय) के दो प्रमुख शिस्य थे – जिनसिंहसूरि तथा जिनप्रबोधसूरि। इन दो आचार्यों से खरतरगच्छ की दो शाखाएं अलग हो गयी। लघु खरतर शाखा के प्रवर्तक श्री जिनसिंहसूरि जी के शिष्य श्री जिनप्रभसूरि जी हुए। श्री जिनप्रभसूरि जी बहुत बड़े शासन प्रभावक आचार्य हुए। आप जैसे अत्यंत प्रभावशाली आचार्य … Read more